रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
नई दिल्ली, 3 दिसंबर 2025: भारत सरकार का ‘संचार साथी’ पोर्टल और ऐप साइबर ठगी व मोबाइल चोरी के खिलाफ प्रभावी हथियार साबित हो रहा है, लेकिन अब इसे हर नए स्मार्टफोन में अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के दूरसंचार विभाग के 28 नवंबर के गोपनीय निर्देश ने भारी राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है।
ऐप की खासियतें हैं- खोया या चोरी हुआ फोन तुरंत ब्लॉक करना, अपने नाम पर चल रहे सभी नंबर देखना-बंद करना, फ्रॉड कॉल-मैसेज की शिकायत करना और सेकंड-हैंड फोन की वैधता जांचना। अब तक 1 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड, 42 लाख फोन ब्लॉक और 3 करोड़ फर्जी कनेक्शन बंद होने के सरकारी आंकड़े इसकी सफलता बताते हैं।
विवाद की जड़ यह है कि दूरसंचार विभाग ने सभी फोन कंपनियों को आदेश दिया है कि नए फोन में संचार साथी ऐप प्री-लोड हो, पहले सेटअप में डिसेबल न हो और पुराने फोन में OTA अपडेट से आए। गैर-अनुपालन पर टेलीकॉम एक्ट-2023 की सजा की चेतावनी भी दी गई है।
कांग्रेस ने इसे “डिजिटल तानाशाही” बताते हुए अनुच्छेद-21 के गोपनीयता अधिकार का उल्लंघन कहा। प्रियंका गांधी ने “स्नूपिंग ऐप”, सी.पी.आई. (एम) सांसद जॉन ब्रिट्टास ने “पेगासस-2” करार दिया। शिवसेना (यू.बी.टी.), टी.एम.सी समेत पूरा विपक्ष सड़क से संसद तक हंगामा कर रहा है।
सरकार का पक्ष है कि ऐप पूरी तरह वैकल्पिक है, कोई कॉल-मैसेज नहीं पढ़ता, निजी डाटा नहीं लेता और यूजर कभी भी डिलीट कर सकता है। मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “यह सिर्फ नागरिकों को साइबर ठगों से बचाने का उपकरण है।”
90 दिन की डेडलाइन नजदीक है। एक तरफ साइबर सुरक्षा की जरूरत, दूसरी तरफ निजता का सवाल- संचार साथी अब सिर्फ ऐप नहीं, बड़ी राजनीतिक जंग का मुद्दा बन चुका है।