रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची, 20 नवंबर 2025: झारखंड में नई उत्पाद नीति-2025 का असर साफ दिख रहा है। अक्टूबर महीने में राज्य सरकार को शराब बिक्री से अब तक का सबसे अधिक 362 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह पिछले वर्षों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है और निजीकरण व पारदर्शी व्यवस्था का नतीजा माना जा रहा है।
मई 2025 में कैबिनेट से मंजूरी मिली इस नीति को 1 सितंबर से पूरी तरह लागू कर दिया गया। इसके तहत राज्य की सभी 1,453 खुदरा शराब दुकानें ई-लॉटरी के ज़रिए निजी व्यापारियों को सौंपी गईं, जबकि थोक कारोबार JSBCL के पास ही रहा। हर बोतल पर ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम लागू होने से नकली व अवैध शराब पर प्रभावी अंकुश लगा है।
नीति लागू होने के पहले महीने सितंबर में ही राजस्व में 48% की छलांग दर्ज की गई थी। अक्टूबर में यह बढ़त और मज़बूत हुई। बियर, देसी और विदेशी शराब की बिक्री में भारी उछाल आया है। विभाग ने चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित लक्ष्य भी बढ़ा दिया है- अब 3,585 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जो पहले 2,985 करोड़ था। अनुमान है कि पूरी नीति से सरकार को अतिरिक्त 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी होगी।
विपक्ष ने दाम बढ़ने का मुद्दा उठाया, लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि पारदर्शिता और बेहतर उपलब्धता से उपभोक्ता भी संतुष्ट हैं। नई नीति से न केवल खजाना भरा, बल्कि अवैध शराब के कारोबार को भी बड़ा झटका लगा है।