रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची, 19 नवंबर 2025: झारखंड में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) शुरू हो गया है। लातेहार, बोकारो, रांची सहित कई जिलों में बीएलओ घर-घर जाकर 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान नामों की मैपिंग कर रहे हैं। नए वोटर जोड़ने के लिए माता-पिता का नाम 2003 या 2025 की सूची में होना जरूरी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने कहा, “यह प्रक्रिया फर्जी वोटर और घुसपैठियों को हटाने के लिए है। 2003 को आधार वर्ष बनाया गया है ताकि अधिकतम नामों का मिलान हो सके।” फरवरी 2026 तक अंतिम सूची प्रकाशित होगी।
विपक्ष ने इसे ‘वोटर हटाओ अभियान’ बताया है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने चेतावनी दी, “बिहार में लाखों नाम काटे गए, ज्यादातर पिछड़े-दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के। झारखंड में भी यही साजिश है।” JMM ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर SIR का विरोध किया और कहा, “चुनाव से पहले मतदाताओं को डराने की कोशिश है।”
भाजपा ने बचाव करते हुए कहा, “यह पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम है। विपक्ष अपनी हार से डर रहा है।” इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ता बूथ स्तर पर सक्रिय हो गए हैं और लोगों को पुरानी सूची डाउनलोड करने की सलाह दे रहे हैं।
जमीनी स्तर पर अफरा-तफरी है। कई मतदाता डर रहे हैं कि उनका नाम कट न जाए। बीएलओ पर भारी दबाव है। राज्य में 2.6 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, जिनमें 8-10% नाम सत्यापन के दायरे में आ सकते हैं।
आयोग ने अपील की है कि मतदाता फॉर्म-7 (नाम हटाने), फॉर्म-8 (सुधार) भरें और दस्तावेज तैयार रखें। हेल्पलाइन 1950 और voterportal.eci.gov.in पर सहायता उपलब्ध है।