सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सैन्य क्षेत्रों की मस्जिदों में आम नागरिकों की नमाज पर रोक बरकरार

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रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)

नई दिल्ली, 18 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में चेन्नई के सैन्य परिसर में स्थित मस्जिद में आम नागरिकों को नमाज अदा करने की अनुमति देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि सैन्य क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यधिक संवेदनशील होते हैं और वहाँ सुरक्षा व्यवस्था से समझौता करने वाला कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा, “सैन्य क्षेत्रों में प्रवेश और उपयोग के नियम सेना के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं। धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन यह किसी एक विशेष स्थान तक सीमित नहीं है। सुरक्षा के मुद्दे सर्वोपरि हैं।”

यह मामला चेन्नई के मिलिट्री क्वार्टर्स में स्थित सदियों पुरानी ‘मस्जिद-ए-आलीशान’ से जुड़ा था। याचिकाकर्ता का दावा था कि यह मस्जिद 1877 से 2022 तक आम लोगों के लिए खुली रही थी और कोविड के बाद लगी रोक को हटाया जाना चाहिए। वहीं भारतीय सेना ने तर्क दिया कि सैन्य क्षेत्रों के धार्मिक स्थल मुख्य रूप से सैनिकों और उनके परिवारों के लिए होते हैं तथा बाहरी लोगों की एंट्री पर स्टेशन कमांडर का फैसला अंतिम होता है।

मद्रास हाईकोर्ट की सिंगल और डिवीजन बेंच पहले ही याचिका खारिज कर चुकी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप से इनकार करते हुए सेना के अधिकार को बरकरार रखा।

यह फैसला देशभर के सभी सैन्य क्षेत्रों में स्थित मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों पर लागू होगा, जहाँ अब आम नागरिकों की प्रवेश अनुमति सेना के विवेक पर निर्भर रहेगी।