बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: राज्यपाल संतोष गंगवार और सीएम हेमंत सोरेन ने दी पारंपरिक श्रद्धांजलि

Spread the News

रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)

रांची, 15 नवंबर 2025: झारखंड के आदिवासी गौरव और स्वतंत्रता सेनानी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आज राज्यव्यापी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्य समारोह रांची के कोकर स्थित बिरसा मुंडा समाधि स्थल और बिरसा चौक पर हुआ, जहां राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों से श्रद्धासुमन अर्पित किए।

सुबह से ही समाधि स्थल को फूलों, रंग-बिरंगे झंडों और आदिवासी प्रतीकों से सजाया गया। ढोल-मांदर की गूंज और पारंपरिक नृत्य के बीच राज्यपाल ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पगड़ी चढ़ाई, जबकि मुख्यमंत्री ने पुष्पांजलि अर्पित की। विधायक कल्पना सोरेन, केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

श्रद्धांजलि के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री उलिहातु (खूंटी) पहुंचे, जहां बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था। वहां भी माल्यार्पण और प्रार्थना सभा आयोजित की गई। राज्यपाल ने कहा, “बिरसा मुंडा का उलगुलान आंदोलन आदिवासी अस्मिता की रक्षा का प्रतीक है। उनका बलिदान झारखंड और देश के लिए प्रेरणा है।”

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट किया, “धरती आबा अमर रहें! उनकी 150वीं जयंती पर हम उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लें।” उन्होंने बिरसा मुंडा को छोटी उम्र में ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती देने वाला महानायक बताया। है

यह दिन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ था। पूरे राज्य में स्कूलों, कॉलेजों और ग्राम पंचायतों में बिरसा मुंडा पर व्याख्यान, चित्रकला और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। आदिवासी समुदाय ने इसे जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया।

बिरसा मुंडा (1875-1900) ने भूमि, जल, जंगल के अधिकारों के लिए उलगुलान थामा और मात्र 25 वर्ष की आयु में शहादत दी। उनकी विरासत आज भी झारखंड की पहचान है।