रांची 09 नवंबर 2025: झारखंड सरकार ने केंद्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्रीय सहायता में पिछले पांच वर्षों में 70% से अधिक की कमी आई है। वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 में केंद्रीय अनुदान कुल प्राप्तियों का 21.06% था, जो 2023-24 में घटकर मात्र 6,266.71 करोड़ रुपये रह गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे ‘राजनीतिक भेदभाव’ बताया और दावा किया कि केंद्र पर राज्य का 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया है।
जल जीवन मिशन में 11,152 करोड़ के मुकाबले केवल 5,917 करोड़ मिले, 5,235 करोड़ अटके। PMGKAY में 227 करोड़, 15वें वित्त आयोग में 2,726 करोड़ और नक्सल क्षेत्रों के लिए SRE/SCAS फंड पिछले दो साल से बंद हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थी राशि 1.30 लाख से घटाकर 1.20 लाख की गई।
राज्य ने उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर जमा करने का दावा किया, लेकिन केंद्र ने फंड रोके। पड़ोसी बिहार को 1.65 लाख करोड़ मिले, झारखंड को सिर्फ 46,000 करोड़। 16वें वित्त आयोग से 50% कर हिस्सा और 3.03 लाख करोड़ विशेष पैकेज मांगा गया है।
बजट 2025-26 में स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, नगर निकाय में कटौती हुई। सरकार श्वेत पत्र जारी करेगी और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएगी। विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक नाटक’ बताया।