नई दिल्ली, 1 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने ज्योति शर्मा बनाम विष्णु गोयल मामले में संपत्ति कानून की दिशा बदल देने वाला फैसला सुनाया। जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने स्पष्ट किया कि किरायेदार, चाहे 5 साल रहें या 50 साल, मालिक नहीं बन सकते।
किरायेदार विष्णु गोयल ने 40 वर्षों के किराए पर रहने के आधार पर प्रतिकूल कब्जे का दावा किया था। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा, “किरायेदार मालिक की अनुमति से रहता है, उसका कब्जा कभी प्रतिकूल नहीं माना जा सकता।” किराया भरने वाला व्यक्ति मालिकाना हक नहीं पा सकता।
कोर्ट ने जोर दिया कि संपत्ति पर अधिकार हमेशा मालिक का रहेगा और वह किसी भी समय अपनी संपत्ति वापस ले सकता है। यह नियम पगड़ी प्रथा, लंबी लीज या पुरानी किरायेदारी पर भी लागू होगा।
यह फैसला लाखों मालिकों के लिए राहत है, जो अब बिना डर के संपत्ति किराए पर दे सकेंगे। वहीं, किरायेदारों के मालिकी के दावे अब समाप्त हो गए। सभी हाई कोर्ट और निचली अदालतें इस मिसाल का पालन करेंगी।
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इसे “संपत्ति कानून में क्रांति” बताया। पुराने पेंडिंग मामले भी इसी आधार पर निपटेंगे। कानून ने मालिक के हक की रक्षा की है।