झारखंड सरकार का नया फैसला: आवासीय नक्शों की मंजूरी में अब 30 दिनों की सख्त समय-सीमा

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रांची 05 अक्टूबर: झारखंड में आवास निर्माण के लिए जमा किए गए नक्शा आवेदनों का निपटारा अब 30 दिनों के अंदर अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। यदि संबंधित अधिकारी निर्धारित अवधि में कोई ठोस आधार के साथ फैसला न ले सकें, तो आवेदन अपने आप ही मान्य हो जाएगा। यह व्यवस्था राज्य के भवन निर्माण नियमों को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो नागरिकों को लालफीताशाही से मुक्ति दिलाएगी।

नगरीय विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी नगरपालिका निकाय, रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण और धनबाद के खनिज पट्टी विकास बोर्ड को झारखंड भवन निर्माण विधान-2016 के अनुभाग 10 के उप-भाग 10.6 के अद्यतन नियमों का कड़ाई से अनुपालन करना पड़ेगा। इस दिशा में निदेशालय ने 15 सितंबर को एक स्पष्ट निर्देश जारी किया है, जिस पर आवास एवं नगर नियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की सहमति प्राप्त हो चुकी है। इस कदम से न केवल प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी, बल्कि अधिकारियों की उत्तरदायित्वबोध भी मजबूत होगी। विभाग के अनुसार, इससे शहरीकरण की गति तेज होगी और सामान्य जनता को अनचाही प्रतीक्षा से छुटकारा मिलेगा।

इस बदलाव की नींव 18 अगस्त को झारखंड उच्च न्यायालय के सक्रिय हस्तक्षेप से पड़ी। अदालत ने रांची महानगर निगम तथा क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण में नक्शा अनुमोदन में विलंब और अनुचित शुल्क वसूली के मुद्दे पर अपनी पहल से संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सवाल उठाया कि विधान में स्पष्ट उल्लेख होने पर भी किन-किन संरचनाओं को स्वयंभू मंजूरी मिली है। इसी के अनुरूप रांची महानगर निगम के प्रशासक को शपथ-पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया, जिसमें लंबे समय से अटके आवेदनों की कुल संख्या, उनके स्वत: अनुमोदन की स्थिति, विलंब के पीछे के कारणों का उल्लेख और अद्यतन नियमों को आधिकारिक पोर्टल पर प्रमुख स्थान देना शामिल है।

पहले यह अवधि मात्र 15 दिनों की थी, लेकिन 17 अगस्त 2017 के अद्यतन से इसे 30 दिनों तक विस्तारित किया गया। साथ ही, आवेदन प्राप्ति के सात दिनों में ही यदि कोई तकनीकी त्रुटि हो, तो सुधार की मांग की जा सकेगी। आवेदक को सात दिनों के अंदर प्रतिक्रिया देनी होगी, अन्यथा अधिकारी मामले की योग्यता के आधार पर आगे बढ़ेंगे। यह सुधार निश्चित रूप से शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां निर्माण परियोजनाएं अक्सर रुकावटों का शिकार होती हैं। नागरिक अब आसानी से स्थानीय प्राधिकरण से संपर्क कर इस समय-सीमा का लाभ उठा सकते हैं।