पटना 30 सितंबर: भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की भारतीय जनता पार्टी में वापसी ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। 30 सितंबर 2025 को दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इससे पहले, राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से बातचीत कर पुरानी कटुता को भुलाया गया। बीजेपी के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने कहा, “पवन सिंह बीजेपी में थे और रहेंगे।” यह कदम 2024 लोकसभा चुनाव में पवन की बगावत के बाद आया, जब उन्होंने काराकाट से निर्दलीय उम्मीदवारी कर एनडीए को नुकसान पहुंचाया था।
2024 में पवन सिंह ने आसनसोल से टिकट न मिलने पर काराकाट से चुनाव लड़ा और कुशवाहा की हार का कारण बने। इससे शाहाबाद क्षेत्र (भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर) की चार लोकसभा सीटें एनडीए हार गया। अब, 2025 विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह ने पवन को वापस लाकर शाहाबाद की 22 सीटों पर कब्जे का प्लान बनाया है। पवन की भोजपुरी समाज, राजपूत और युवा वोटरों में लोकप्रियता से एनडीए को फायदा मिल सकता है। माना जा रहा है कि वे आरा या बरहरा से टिकट पा सकते हैं।
हालांकि, विपक्षी नेता तेज प्रताप यादव ने तंज कसा कि “पैर पकड़ने वाले अब कुशवाहा के साथ हैं।” विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति मगध और शाहाबाद की 10-12 सीटों पर एनडीए को मजबूती दे सकती है। अगर पवन वोटों में जादू दिखा पाए, तो यह शाह का मास्टरस्ट्रोक होगा, वरना जोखिम भी कम नहीं।