रामगढ़, 25 सितंबर 2025: झारखंड के रामगढ़ जिले में आज हजारों आदिवासियों ने कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के खिलाफ विशाल विरोध प्रदर्शन किया। सरना समिति और संयुक्त आदिवासी संगठन के नेतृत्व में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे, “कुड़मी को एसटी नहीं देंगे” के नारे लगाते हुए अपनी एकजुटता दिखाई। यह प्रदर्शन 20 सितंबर से शुरू हुए कुड़मी समुदाय के ‘रेल टेका-डहर झेका’ आंदोलन के जवाब में है, जिसमें रेल पटरियां जाम की गई थीं।
आदिवासी संगठन कुड़मी को एसटी दर्जा देने का विरोध इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि कुड़मी की सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि आदिवासियों से अलग है और वे केंद्र के 18 मानदंडों को पूरा नहीं करते। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह दर्जा मिलने से मूल आदिवासियों के आरक्षण, नौकरी और शिक्षा के अवसर प्रभावित होंगे। 22 सितंबर को बाइक रैली और 24 सितंबर को विरोध मार्च के बाद आज का जनसैलाब तनाव का नया चरण है।
कुड़मी समुदाय, जो ओबीसी में है, लंबे समय से एसटी दर्जा और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहा है। उनके रेल जाम को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने असंवैधानिक करार दिया, फिर भी आंदोलन जारी है। आजसू पार्टी के समर्थन से यह मुद्दा सियासी रंग ले चुका है। आदिवासियों ने विधानसभा तक धरना देने की चेतावनी दी है। स्थिति तनावपूर्ण है, और सुरक्षा बल सतर्क हैं।