झारखंड की स्कूली शिक्षा में शामिल होगा शिबू सोरेन का अध्याय

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रांची, 23 सितंबर 2025: झारखंड सरकार ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन और योगदान को सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अगले शैक्षणिक सत्र से यह लागू होगा। झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने सिलेबस तैयार कर लिया है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को शिबू सोरेन के आदिवासी अधिकारों और झारखंड आंदोलन में योगदान से परिचित कराना है।

सिलेबस में कक्षा 1-2 के लिए चित्रकथाओं के माध्यम से उनका सरल परिचय, कक्षा 7 में रात्रि पाठशालाओं पर फोकस और कक्षा 9-12 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना (1973), महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन और आदिवासी शोषण के विरुद्ध संघर्ष को शामिल किया जाएगा। कुल आठ पुस्तकों में उनके योगदान को इतिहास और सामाजिक विज्ञान के अध्यायों में जोड़ा जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत 2026 से कक्षा 1-4 और 2027 से कक्षा 5-8 में लागू होगा।

शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा, “शिबू सोरेन का जीवन झारखंड के गौरव का प्रतीक है। यह कदम छात्रों में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाएगा।” शिबू सोरेन (1931-2025) के निधन के बाद विधानसभा में उन्हें भारत रत्न देने की मांग भी उठी है। यह पहल शिक्षा को स्थानीय इतिहास से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।