रांची, 18 सितंबर 2025: झारखंड में कुर्मी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जा देने की मांग ने सामुदायिक तनाव को बढ़ा दिया है। आदिवासी संगठन इस मांग को उनके संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर खतरा मानते हैं। इसके विरोध में 20 सितंबर को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक रांची के राजभवन के सामने विशाल धरना आयोजित होगा। केंद्रीय सरना समिति के नेतृत्व में पूर्व मंत्री देवकुमार धान, गीताश्री उरांव, निशा भगत, डब्लू मुंडा, राजेश लिंडा, अमर तिर्की जैसे नेता इसमें शामिल होंगे। आदिवासी संगठन कुर्मी मांग को “फर्जी इतिहास” पर आधारित बताते हुए कहते हैं कि यह आदिवासियों के 26% आरक्षण और जमीन के अधिकारों को कमजोर करेगा।
दूसरी ओर, टोटेमिक कुड़मी विकास मोर्चा का दावा है कि 1931 की जनगणना में कुड़मी समाज को ST माना गया था। वे 20 सितंबर से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 100 जगहों पर रेल रोको और रोड ब्लॉक करेंगे। साथ ही कुर्माली भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी है। इस आंदोलन से पहले अप्रैल 2023 में 250 ट्रेनें प्रभावित हुई थीं।
पुलिस ने हाई अलर्ट जारी किया है, क्योंकि रेल और सड़क यातायात ठप हो सकता है। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा संवेदनशील है, क्योंकि कुर्मी वोट बैंक (22% आबादी) प्रभावशाली है। आदिवासी संगठन 17 अक्टूबर को उपायुक्त कार्यालयों का घेराव करेंगे। दोनों पक्षों ने शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की है, लेकिन तनाव चरम पर है।