JSSC सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा के नतीजों में बड़ी खामियां, अभ्यर्थियों में रोष

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रांची, 13 अगस्त 2025: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सहायक आचार्य प्रतियोगी परीक्षा-2023 के परिणामों में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिससे अभ्यर्थियों में व्यापक असंतोष फैल गया है। परिणामों में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां एक ही उम्मीदवार को दो अलग-अलग आरक्षित वर्गों और विभिन्न जिलों में चयनित दिखाया गया है, जो नियमों के खिलाफ है।

जानकारी के मुताबिक, सरायकेला-खरसावां जिले में एक अभ्यर्थी को अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और पिछड़ा वर्ग (BC) दोनों श्रेणियों में सफल घोषित किया गया, जबकि एक अन्य उम्मीदवार को पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजाति (ST) दोनों में जगह मिली। साहिबगंज में एक अभ्यर्थी का नाम अनारक्षित और EBC दोनों सूचियों में शामिल है। इसके अलावा, भाषा विषय के एक उम्मीदवार का चयन दुमका और पूर्वी सिंहभूम दोनों जिलों में हो गया। JSSC के नियमों के अनुसार, कोई भी अभ्यर्थी केवल एक आरक्षित श्रेणी और एक जिले में ही चयनित हो सकता है, लेकिन परिणामों में इन नियमों की अवहेलना स्पष्ट है।

शिक्षा विशेषज्ञ मोहम्मद ताहिर हुसैन ने इसे परिणाम तैयार करने में बड़ी लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा, “नियुक्ति के लिए आरक्षित श्रेणियों के नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं। एक व्यक्ति का दो अलग-अलग श्रेणियों में चयन असंभव है। यह गलती प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि को दर्शाती है।”

JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता ने दावा किया कि आयोग को इस तरह की शिकायतों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने अभ्यर्थियों से साक्ष्य के साथ शिकायत दर्ज करने की अपील की, ताकि त्रुटियों को सुधारा जा सके। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि परिणामों में पारदर्शिता का अभाव है और मेरिट लिस्ट व कटऑफ अंकों के बारे में भी अस्पष्टता बरती गई है।

पहले भी, 21 जुलाई 2025 को सैकड़ों अभ्यर्थियों ने नामकुम में JSSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर परिणामों में धांधली का आरोप लगाया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि जल्दी ही समाधान नहीं किया गया, तो उनका आंदोलन और तेज होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए JSSC को 14 अगस्त 2025 तक सभी परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा है कि परिणाम झारखंड हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन हैं और जरूरत पड़ने पर इसमें सुधार किया जाएगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खामियां शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि रिक्त पदों के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए और त्रुटियों को तुरंत ठीक किया जाए।