नई दिल्ली/पटना: केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए अब राज्य शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने की बाध्यता को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय खासकर बिहार सहित देशभर के निजी स्कूलों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
सीबीएसई द्वारा जारी संशोधित नियमों के अनुसार, अब कोई भी स्कूल सीधे ‘सरस पोर्टल’ पर आवेदन करके मान्यता प्राप्त कर सकता है। अगर राज्य शिक्षा विभाग तय समयसीमा के भीतर कोई जवाब नहीं देता है, तो इसे स्वीकृति के रूप में माना जाएगा। यह नई प्रणाली शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जाएगी।
पहले स्कूलों को सीबीएसई से मान्यता लेने के लिए संबंधित राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्राप्त करना होता था। यह प्रक्रिया कई बार लंबी और जटिल हो जाती थी, जिससे कई स्कूलों को अपने सत्र की शुरुआत में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
अब स्कूल आवेदन भेजने के बाद बोर्ड संबंधित राज्य शिक्षा विभाग को सूचना देगा और 30 दिन के भीतर उनकी प्रतिक्रिया मांगेगा। जवाब न मिलने की स्थिति में 15 दिन का अतिरिक्त समय देते हुए रिमाइंडर भेजा जाएगा। अगर इसके बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आती, तो यह मान लिया जाएगा कि राज्य सरकार को उस स्कूल की मान्यता पर कोई आपत्ति नहीं है।
पटना के एक निजी स्कूल संचालक ने इस बदलाव को “क्रांतिकारी” बताते हुए कहा, “एनओसी की प्रक्रिया में महीनों लग जाते थे, जिससे नया सत्र प्रभावित होता था। अब यह प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी।”
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इस बदलाव पर चिंता भी जताई है। बिहार शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यदि विभाग समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे सका, तो संभव है कि मान्यता उन स्कूलों को भी मिल जाए जो आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करते जैसे कि उचित भवन, शिक्षक या अन्य मूलभूत सुविधाएं।
फिर भी, शिक्षा क्षेत्र में इसे एक प्रगतिशील कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे योग्य स्कूलों को अनावश्यक प्रशासनिक अड़चनों से राहत मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और सुचारू बन सकेगी।